चूरू, । प्रतिभा नगर स्थित सोती भवन में आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन संत हरिशरण दास ने कहा कि सत्य से विमुख होना व्यक्ति के लिए समस्या का कारण बन जाया करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा सत्यनिष्ठ आचरण करते परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए ताकि व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा विकसित हो सके। कुमार केशव सेवा प्रन्यास की ओर से आयोजित भागवत कथा में संत हरिशरण दास ने कथा के विभन्न प्रसंगों पर चर्चा करते हुए कहा कि कथा सुनने से व्यक्ति को नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि कथा विकृत भावों के विकारों को मिठाकर सद विचार का निर्माण करती है। उनका कहना था कि व्यक्त को कभी किसी के प्रति बूरा नहीं सोचना चाहिए। दूसरों के प्रति यदि गलत भाव आए तो उन्हें गलति का अहसास कर मिटा देना चाहिए। क्योंकि सत्य और धर्म पर चलनेवाला व्यक्त कभी बूरा नहीं सोच सकता। इसलिए हमें कभी कामना भी नहीं करनी चाहिए। कथा के शुभारंभ पर उन्होंने राजा परीक्षित को मिले श्राप और उनसे मुक्ति के लिए शुकदेव जी द्वारा भागवत कथा सुनाने की शुरुआत का प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।
मनुष्य को भगवान की भक्ति करनी चाहिए- संत हरिशरण दास
1/06/2026 10:25:00 am
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चूरू, । प्रतिभा नगर स्थित सोती भवन में आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन संत हरिशरण दास ने कहा कि सत्य से विमुख होना व्यक्ति के लिए समस्या का कारण बन जाया करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा सत्यनिष्ठ आचरण करते परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए ताकि व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा विकसित हो सके। कुमार केशव सेवा प्रन्यास की ओर से आयोजित भागवत कथा में संत हरिशरण दास ने कथा के विभन्न प्रसंगों पर चर्चा करते हुए कहा कि कथा सुनने से व्यक्ति को नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि कथा विकृत भावों के विकारों को मिठाकर सद विचार का निर्माण करती है। उनका कहना था कि व्यक्त को कभी किसी के प्रति बूरा नहीं सोचना चाहिए। दूसरों के प्रति यदि गलत भाव आए तो उन्हें गलति का अहसास कर मिटा देना चाहिए। क्योंकि सत्य और धर्म पर चलनेवाला व्यक्त कभी बूरा नहीं सोच सकता। इसलिए हमें कभी कामना भी नहीं करनी चाहिए। कथा के शुभारंभ पर उन्होंने राजा परीक्षित को मिले श्राप और उनसे मुक्ति के लिए शुकदेव जी द्वारा भागवत कथा सुनाने की शुरुआत का प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।

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