*जिला स्तरीय निरीक्षण समिति ने राजकीय संप्रेक्षण एवं किशोर गृह तथा शिशु गृह का किया निरीक्षण*
झुंझुनूं(चंद्रकांत बंका) जिला स्तरीय निरीक्षण समिति द्वारा राजकीय संप्रेक्षण एवं किशोर गृह तथा शिशु गृह झुंझुनूं का व्यापक निरीक्षण किया गया। समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला कलक्टर अजय कुमार आर्य ने की। इस दौरान बाल संरक्षण एवं बाल अधिकारिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई और आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
इस निरीक्षण में सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई अरविंद ओला, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नेमीचंद कुमावत, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. प्यारेलाल भालोठिया एवं किशोर न्याय बोर्ड सदस्य सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
*बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास पर विशेष ध्यान*
निरीक्षण समिति का प्रमुख उद्देश्य विधि से संघर्षरत बालकों और देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करना था। समिति ने गृह में रहने वाले बच्चों की शिक्षा, प्रशिक्षण, चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य और उनके अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गहन समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान समिति ने निर्देश दिए कि बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अन्य कौशल आधारित पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाए। इससे वे समाज में स्वावलंबी बनकर आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर सकें।
बालकों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, नियमित काउंसलिंग और चिकित्सा पर विशेष जोर दिया गया। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और काउंसलरों की सहायता से बच्चों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
*जमानत प्रक्रिया और पुनर्वास पर जोर*
निरीक्षण के दौरान किशोर न्याय बोर्ड के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए ताकि जमानत और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का शीघ्र निपटान हो सके। समिति ने स्पष्ट किया कि बच्चों को लंबे समय तक संप्रेक्षण गृह में न रखते हुए समाज में पुनर्वासित किया जाना आवश्यक है।
*रहन-सहन और खान-पान की व्यवस्था संतोषजनक*
निरीक्षण समिति ने बच्चों के रहने, खाने-पीने और अध्ययन की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास सुचारू रूप से हो सके। इसके अलावा, अध्ययन के लिए उपयुक्त वातावरण और संसाधन मुहैया कराने के भी निर्देश दिए गए।
*शिशु गृह की सुविधाओं का भी किया निरीक्षण*
शिशु गृह में रहने वाले बच्चों को दी जा रही सुविधाओं की भी गहन समीक्षा की गई। समिति ने अधीक्षक को निर्देशित किया कि बच्चों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाए और दत्तक ग्रहण संबंधी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय में पूरा किया जाए। निरीक्षण में शिशु गृह की साफ-सफाई व्यवस्था संतोषजनक पाई गई।
*समिति ने दिए आवश्यक निर्देश*
निरीक्षण समिति ने अधीक्षक को निर्देशित किया कि बच्चों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिलाने, अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से नियमित काउंसलिंग करवाने की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही, दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को तेज करने और बच्चों को परिवारिक माहौल देने पर बल दिया गया।
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"जिला स्तरीय निरीक्षण समिति के इस निरीक्षण से यह सुनिश्चित किया गया कि संप्रेक्षण एवं किशोर गृह तथा शिशु गृह में रहने वाले बच्चों को सभी आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं। समिति ने गृह प्रशासन को बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने के निर्देश दिए"
(अरविंद ओला, सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग)

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