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बालिका शिक्षा को लेकर बदल रही है समाज की सोचः सिद्धार्थ सिहाग

 



जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने घांघू की छात्रा जैतून बानो कुरैशी को दिया ममता अवार्ड, कहा- होनहार बालिकाओं को सम्मानित करने की पहल सराहनीय

चूरू, । जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने बुधवार को घांघू के शहीद राजेश कुमार फगेड़िया उच्च माध्यमिक विद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली जैतून बानो कुरैशी को ममता अवार्ड से सम्मानित किया। इस दौरान जैतून को सम्मान पत्र एवं ग्यारह हजार रुपए प्रदान किए गए। 

इस मौके पर जिला कलक्टर ने टॉपर बालिका को सम्मानित करने की पहल के लिए घांघू के परमेश्वर लाल दर्जी की पहल को सराहनीय बताया और कहा कि इससे न केवल बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि दूसरी बालिकाओं को भी अच्छी मेहनत करने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि भामाशाहों द्वारा प्रत्येक विद्यालय में इस तरह की पहल की जा सकती है। जिला कलक्टर ने कहा कि आज जमाना शिक्षा का है और बालिकाएं प्रत्येक क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। बालिका शिक्षा को लेकर समाज की सोच निरंतर बदल रही है और यह बहुत बेहतर संकेत है। जिला कलक्टर ने इस दौरान सम्मानित बालिका जैतून से बातचीत की और अवार्ड के लिए बधाई देते हुए उससे पढाई और आगे के लक्ष्य के बारे में चर्चा की। जैतून ने बताया कि इस अवार्ड से उसका हौसला बहुत बढ़ा है और वह आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती है। जैतून ने बताया कि उसके दादा युनुस अली  कुरैशी की प्रेरणा मूल रूप से इस सफलता के पीछे है।  

महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक सीमा गहलोत ने कहा कि सरकारी स्तर पर बालिकाओं के पोषण और पढाई के लिए बेहतरीन प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन यदि सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह के प्रयास होते हैं तो नारी सशक्तीकरण की बुनियाद को अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। 

शहीद राजेश फगेड़िया राउमावि के प्रधानाचार्य प्रताप सिंह कुमावत ने विद्यालय की टॉपर बालिका को प्रतिवर्ष दिए जा रहे इस अवार्ड के बारे में बताया और कहा कि इससे विद्यालय की बालिकाओं में उत्साह का माहौल है। पुरस्कार प्रदाता परमेश्वर लाल दर्जी ने बताया कि बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन के लिए उनका यह छोटा सा प्रयास है। यदि किसी बालिका को इससे  प्रोत्साहन मिलता है और वह आगे बढती है तो यही उनके पुरस्कार की सार्थकता होगी। 

इस दौरान वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक सफी मोहम्मद गांधी, जैतून के पिता अब्दुल मजीद कुरैशी, सामाजिक कार्यकर्ता महावीर नेहरा, संजय दर्जी, मोहम्मद रहीश, शीशराम श्योराण, मुकेश कुमार शर्मा, अरमान कुरैशी आदि मौजूद थे। 

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