झुंझुनू के भगवान: डॉ. मूलसिंह शेखावत
झुंझुनू(चंद्रकांत बंका) राजस्थान की वीरभूमि झुंझुनू सिर्फ अपनी हवेलियों और देशभक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान के लिए भी जानी जाती है जिसे लोग “भगवान” का दर्जा देते हैं — **डॉ. मूलसिंह शेखावत**। नाक, कान और गले के मरीजों के लिए तो वे सच में ईश्वर का ही दूसरा रूप हैं।
जड़ें झेरली से, पहचान पूरे हिंदुस्तान में
झुंझुनू जिले के छोटे से गांव झेरली में जन्मे डॉ. मूलसिंह जी ने अपनी कर्मभूमि भी झुंझुनू को ही बनाया। दशकों से बिना थके, बिना रुके, वे जिले के लाखों मरीजों की उम्मीद बने हुए हैं। झुंझुनू में बच्चा-बच्चा उन्हें प्यार से “डॉ. मूल जी” कहकर पुकारता है।
80 की उम्र, पर हौसला 18 जैसा
आज जब उम्र 80 के पड़ाव पर है, तब भी उनका समर्पण जवान है। सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक क्लिनिक का दरवाजा हर मरीज के लिए खुला रहता है। न गर्मी रोक पाती है, न सर्दी, न उम्र। उनका कहना है — "जब तक सांस है, सेवा बंद नहीं होगी।" यही नित्य कर्म उनकी सबसे बड़ी पूजा है।
इलाज से पहले इंसानियत
डॉ. मूल जी की सबसे बड़ी खासियत उनका सरल और हंसमुख स्वभाव है। जात-पात, धर्म-सम्प्रदाय से ऊपर उठकर वे हर दुख-सुख में लोगों के साथ खड़े मिलते हैं। अगर किसी मरीज के पास फीस के पैसे नहीं हैं, या दवा खरीदने की हैसियत नहीं है, तो डॉ. जी न सिर्फ फीस माफ कर देते हैं, बल्कि दवा का इंतजाम भी खुद करते हैं। उनके लिए मरीज पहले है, पैसा बाद में।
डॉक्टर के साथ-साथ जननेता भी
डॉ. मूलसिंह जी का व्यक्तित्व सिर्फ क्लिनिक तक सीमित नहीं है। उनकी शानदार राजनीतिक पारी भी रही है और जनता के विश्वास ने उन्हें एक बार विधायक भी बनाया। सफेद कोट हो या खादी का कुर्ता — दोनों में उन्होंने सिर्फ सेवा को ही धर्म माना।
वो पर्ची, जिसे पूरा देश सलाम करता है
गोल्ड मेडलिस्ट एम.बी.बी.एस, एम.एस डॉ. मूल जी की काबिलियत का डंका पूरे मेडिकल जगत में बजता है। आज भी अगर उनकी लिखी पर्ची देश के किसी भी बड़े अस्पताल में दिखाई जाए, तो वहां के डॉक्टर आदर और सम्मान से सिर झुका देते हैं। यह सम्मान कमाना हर किसी के बस की बात नहीं।
झुंझुनू की असली शान
मिलनसार, सहनशील और हर दिल अजीज डॉ. मूलसिंह शेखावत सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, एक संस्था हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि डिग्री से बड़ा दिल होता है, और पद से बड़ी सेवा।
झुंझुनू की मिट्टी को गर्व है कि उसने डॉ. मूल जी जैसा अनमोल हीरा पैदा किया। जब तक इंसानियत जिंदा है, तब तक डॉ. मूलसिंह शेखावत जैसे भगवान स्वरूप इंसानों का नाम अमर रहेगा।

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