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प्लास्टिक मुक्त राजस्थान की दिशा में बर्तन बैंक योजना



मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील प्रयास, पर्यावरण संरक्षण के साथ पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायतों में बर्तन बैंक, चूरू जिले की 21 ग्राम पंचायतों में स्थापित किए बर्तन बैंक, जनभागीदारी से स्वच्छता हो रही सुनिश्चित

चूरू, 02 जनवरी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार “बर्तन बैंक योजना” एक अभिनव एवं जनहितकारी पहल है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सामाजिक, धार्मिक एवं पारिवारिक आयोजनों में एकल-उपयोग प्लास्टिक के प्रयोग को कम करना तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाना है। ​


उद्देश्य और पृष्ठभूमि : पर्यावरण चुनौती का सामना और पर्यावरण संरक्षण

वर्तमान में सामाजिक कार्यक्रमों व रोजमर्रा के कार्यों में प्लास्टिक का उपयोग पर्यावरण के लिए चुनौती बनकर खड़ा हो गया है। प्लास्टिक कचरा पर्यावरण प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य और पशु जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। विशेषकर विवाह, भोज, मेलों और सामूहिक आयोजनों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक प्लेट, गिलास एवं चम्मच का उपयोग होता है, जो बाद में कचरे के रूप में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी समस्या के समाधान हेतु राज्य सरकार की बजट घोषणा वर्ष 2025-26 के क्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक / डिस्पोजल के उपयोग को कम करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर स्टील के बर्तन उपलब्ध करवाते हुए "बर्तन बैंक स्थापित किए गए हैं। इस हेतु प्रथम चरण में प्रदेश में एक हजार ग्राम पंचायतों को एक-एक लाख रुपए के बर्तन उपलब्ध करवाए गए हैं। 
गौरतलब है कि प्लास्टिक उत्पाद रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बन गए है, जिसके परिणामस्वरूप प्लास्टिक की खपत बढ़ गई है। प्लास्टिक से होने वाली बीमारियों के कारण प्रतिवर्ष लाखों लोगों की अकाल मृत्यु हो जाती है। प्लास्टिक कचरा देश के ग्रामीण इलाकों में एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती के रूप में भी उभरा है। इस हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में बर्तन बैंक का उपयोग एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है। प्रदेश सरकार द्वारा प्लास्टिक मुक्त गांव करने के लिए अनेक प्रयासों के अन्तर्गत बर्तन बैंक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली सरकारी बैठकों, व्यक्तिगत / सामाजिक / धार्मिक / सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि में उपयोग होने वाले प्लास्टिक / डिस्पोजल के स्थान पर स्टील के बर्तनों के उपयोग से प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाई जाकर इसके उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकेगा।


जिले की 21 ग्राम पंचायतों में बने बर्तन बैंक

प्रदेश सरकार की बर्तन बैंक योजना अंतर्गत जिले की 21 ग्राम पंचायतों प्रत्येक ब्लॉक से 03 ग्राम पंचायत में बर्तन बैंक स्थापित किए गए हैं। योजना अंतर्गत जिले की तारानगर ब्लॉक की बूचावास, सात्यूं, राजपुरा, सरदारशहर ब्लॉक की मेहरासर उपाधियान, बुकनसर बड़ा, उड़सर लोडेरा, सुजानगढ़ ब्लॉक की जैतासर, सालासर, गोपालपुरा, चूरू ब्लॉक कर आसलखेड़ी, सिरसला, घांघू, बीदासर ब्लॉक की चाड़वास, लालगढ़, सांडवा, रतनगढ़ ब्लॉक की पड़िहारा, गोगासर, लाछड़सर तथा राजगढ़ ब्लॉक की कालरी, ददरेवा व सिद्धमुख ग्राम पंचायत बर्तन बैंक स्थापित किए गए हैं। 


यह है बर्तन बैंक की कार्यप्रणाली
 
ग्राम पंचायतों में स्थापित बर्तन बैंकों में विभिन्न प्रकार के स्टील के बर्तन जैसे प्लेट, चम्मच, गिलास, कटोरी आदि के सेट उपलब्ध करवाए गए हैं, जिन्हें ग्राम पंचायत/ गांव स्तर पर बैंक के रूप में रखा गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत हेतु बर्तन के न्यूनतम 400 सेट उपलब्ध होंगे। प्रत्येक सेट में 01 प्लेट, 03 कटोरी, 01 चम्मच एवं 01 गिलास आदि कुल 06 बर्तन होंगे, जिस पर ग्राम पंचायत (नाम ग्राम पंचायत) बर्तन बैंक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रा.) की मार्किंग की गई है। बर्तन बैंक में बर्तनों को व्यवस्थित तरीके से रखने एवं प्रदर्शित करने के लिए एक रैक की व्यवस्था की गई है। बर्तन बैंक खुलने व जनभागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।

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