सुमेर सिंह राव
उदयपुरवाटी l उपखंड क्षेत्र के पचलंगी कस्बे में आज भी गणगौर पूजन की पुरानी रस्म नव विवाहिताए व महिलाएं परंपरा के साथ निभा रही है। होली के दुसरे दिन से शुरू हुये गणगौर पर्व इन दिनो परवान पर है सुबह सुबह ही नवविवाहिताऐ , युवतियां व महिलाऐ मंगल गीतो के साथ गणगौर पूजन करती है ।शीतला अष्टमी को नवविवाहिता,युवती व महिला गीत गाती हुई कुम्हार के घर से मिट्टी कि गणगौर बनवाकर उनका श्रृंगार करके गणगौर पूजती है जिनमे गणगौर पूजने वाली नवविवाहिता, युवती,महिलाओ के द्वारा गणगौर का बिनोरी निकाली जाती है। दोपहर मे गणगौर को पानी पिलाना, रात को घुङला घुमाना आदि करती है।
महिलाएं गोर ये गणगौर माता खोल किवाड़ी बाहर खड़ी तेरी पूजन वाली मंगल गीतों के साथ गणगौर पूजन करती है । गणगौर पूजन पर्व अखंड सुहाग के लिए माना जाता है। गणगौर पूजन में मोनिका सिद्धू कुमारी चोटिया, ज्योति, आशा, जोशी ,मानसी, सिमरन ,सन्तोष, सुनीता, रेणु, गीता ,मंजू सहित कई महिलाएं शामिल हैं।

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