सुमेर सिंह राव
उदयपुरवाटी / बुगाला
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को मुरलीधर गुप्ता की अध्यक्षता में मातृभाषा दिवस मनाया गया। रामजीलाल खेदड़ ने बताया कि इस दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया।सोनू मेघवाल ने समय को भरोसो कोनी कद पल्टी मार जावै, मधु व पूजा ने आ तो सुरगां न शरमावै,इण पर देव रमण नै आवै आदि राजस्थानी गीतों की प्रस्तुतियां दी।व्याख्याता सविता आलड़िया ने जानकारी देते हुए बताया कि देश आजाद हुआ तब फैसला लिया गया कि राज्यों की मातृभाषा को संवैधानिक मान्यता दी जाए ताकि उनकी भाषा,कला,
संस्कृति व उससे जुड़े उनके संस्कार जीवित रहें।उस समय अनेक राज्यों की मातृभाषा को संवैधानिक दर्जा मिल गया परन्त राजस्थान पिछड़ गया।हमारे संस्कार और संस्कृति से जुड़ी मायड़ भाषा को ही उसका सम्मान नहीं मिल पा रहा है जिसके कारण यह भाषा जन जन से कटती जा रही है।आज नई पीढ़ी के लिए हमारी मातृभाषा आन बान और शान की प्रतीक नहीं बल्कि पिछड़ेपन की बोली बनकर रह गई। अध्यक्षीय उद्बोधन में एमडी गुप्ता ने कहा कि स्कूलों में प्राइमरी स्तर तक कि शिक्षा राजस्थानी भाषा मे ही होनी चाहिए।अगर समय रहते इसको संवैधानिक मान्यता नहीं मिली तो आने वाले समय में यह भाषा केवल अतीत बनकर रह जाएगी।वर्ष 2003 में राजस्थान विधानसभा ने इस भाषा को संविधान की अनुसूची में शामिल करने के लिए संकल्प पत्र पारित करके केंद्र सरकार को भेजा था लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। केंद्र के प्रशासनिक अधिकारियों व सरकार की खींचतान ने शिक्षा के लिए जरूरी मायड़ भाषा को स्कूली शिक्षा से दूर किया है।कार्यक्रम का संचालन दीपिका चौधरी ने किया।विद्यार्थियों ने राजस्थानी हमारी मायड़ भाषा है इसकी मान्यता लेकर रहेंगे नारे लगाए।इस मौके पर सत्यवीर सिंह,राजवीर सिंह,कमलेश कुमार, जितेंद्र सिंह, विक्रम सिंह आदि मौजूद रहे।

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