शिविर में चूरू जिले सहित आसपास के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मिर्गी रोगी पहुंचे। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की विस्तृत जांच कर उन्हें बीमारी के कारण, उपचार तथा आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।शिविर के मुख्य न्यूरो फिजिशियन डॉ. आर.के. सुरेका ने कहा कि बुजुर्गों में मिर्गी रोग को अक्सर बुढ़ापे की सामान्य कमजोरी या अन्य कारणों से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में मिर्गी के नए मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा मस्तिष्क की छोटी-छोटी चोटें बुजुर्गों में मिर्गी का कारण बन सकती हैं।डॉ. सुरेका ने कहा कि बुजुर्गों में मिर्गी के दौरे कई बार सामान्य लक्षणों के रूप में दिखाई देते हैं, जैसे अचानक गिर जाना, कुछ समय के लिए याददाश्त खो देना या हाथ-पैरों में अकड़न आना। ऐसे लक्षणों को अक्सर हृदय रोग या नसों की कमजोरी समझ लिया जाता है, जबकि कई मामलों में इनके पीछे मिर्गी रोग जिम्मेदार होता है। उन्होंने बताया कि सही समय पर जांच और उचित उपचार मिलने पर 70 से 80 प्रतिशत बुजुर्ग मरीज सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।उन्होंने परिवारजनों से अपील करते हुए कहा कि बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें, उनकी दवाएं नियमित रूप से दिलवाएं, पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार के दौरे को गंभीरता से लें। मिर्गी कोई कलंक या दैवी प्रकोप नहीं, बल्कि मस्तिष्क से संबंधित एक सामान्य बीमारी है, जिसका प्रभावी उपचार उपलब्ध है।शिविर के सफल आयोजन में श्री प्रकाश सुरेका, डॉ. रोहित सुरेका, डॉ. रक्षित सुरेका, डॉ. जयसिंह, डॉ. सरीन, डॉ. गौरी तथा ताजू खान सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बुजुर्गों में मिर्गी के लक्षणों को नजरअंदाज न करेंः- डॉ. सुरेका
6/02/2026 09:11:00 pm
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शिविर में चूरू जिले सहित आसपास के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मिर्गी रोगी पहुंचे। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की विस्तृत जांच कर उन्हें बीमारी के कारण, उपचार तथा आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।शिविर के मुख्य न्यूरो फिजिशियन डॉ. आर.के. सुरेका ने कहा कि बुजुर्गों में मिर्गी रोग को अक्सर बुढ़ापे की सामान्य कमजोरी या अन्य कारणों से जोड़कर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में मिर्गी के नए मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा मस्तिष्क की छोटी-छोटी चोटें बुजुर्गों में मिर्गी का कारण बन सकती हैं।डॉ. सुरेका ने कहा कि बुजुर्गों में मिर्गी के दौरे कई बार सामान्य लक्षणों के रूप में दिखाई देते हैं, जैसे अचानक गिर जाना, कुछ समय के लिए याददाश्त खो देना या हाथ-पैरों में अकड़न आना। ऐसे लक्षणों को अक्सर हृदय रोग या नसों की कमजोरी समझ लिया जाता है, जबकि कई मामलों में इनके पीछे मिर्गी रोग जिम्मेदार होता है। उन्होंने बताया कि सही समय पर जांच और उचित उपचार मिलने पर 70 से 80 प्रतिशत बुजुर्ग मरीज सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।उन्होंने परिवारजनों से अपील करते हुए कहा कि बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें, उनकी दवाएं नियमित रूप से दिलवाएं, पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार के दौरे को गंभीरता से लें। मिर्गी कोई कलंक या दैवी प्रकोप नहीं, बल्कि मस्तिष्क से संबंधित एक सामान्य बीमारी है, जिसका प्रभावी उपचार उपलब्ध है।शिविर के सफल आयोजन में श्री प्रकाश सुरेका, डॉ. रोहित सुरेका, डॉ. रक्षित सुरेका, डॉ. जयसिंह, डॉ. सरीन, डॉ. गौरी तथा ताजू खान सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


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