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दो वर्षों का संकल्प, हरियाली का नया अध्याय




राजस्थान में वन संरक्षण और विकास की बदलती तस्वीर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के दो वर्षों के प्रयासों से वन क्षेत्र में नया विकास, राजस्थान में लगाए 19 करोड़ से अधिक पौधे, वन एवं वन्य जीव संरक्षण के अभूतपूर्व प्रयास 


चूरू (मनीष कुमार सहायक जनसंपर्क अधिकारी)। राजस्थान को जहाँ कभी मरुस्थल के रूप में पहचाना जाता है, वहीं आज हरियाली, जैव-विविधता और वन्यजीव संरक्षण की एक नई कहानी लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में विगत दो वर्षों के दौरान वन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रदेश सरकार की हरित राजस्थान की संकल्पना से राज्य में वन संरक्षण, वन्यजीव संवर्धन एवं हरित विकास को नई दिशा मिली है।


हरियाली का महाअभियान : मिशन हरियालो राजस्थान 


प्रदेश में मिशन हरियालो राजस्थान के अंतर्गत 19 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है। इसके साथ ही राज्य स्तरीय वन महोत्सव के दौरान 04 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। आमजन की भागीदारी को मजबूत करने के लिए 600 से अधिक नर्सरियों के माध्यम से 10.15 करोड़ पौधों का वितरण किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण एक जनआंदोलन के रूप में उभरा है।


हर जिले में मातृ वन : हरियाली की नई पहचान


प्रदेश के प्रत्येक जिले में मातृ वन की स्थापना कर भावनात्मक जुड़ाव के साथ पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा दी गई। यह पहल न केवल हरित आवरण बढ़ा रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित कर रही है।


वन मित्र : वन संरक्षण के सच्चे साथी


वन संरक्षण को मजबूत करने के लिए प्रदेश में 4196 वन मित्र बनाए गए हैं। यह वन मित्र न केवल वनों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय को संरक्षण से जोड़ने का सेतु भी बन रहे हैं।


वन्यजीव संरक्षण में ऐतिहासिक पहल


प्रदेश सरकार द्वारा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के रूप में जिले के तालछापर वन्यजीव अभयारण्य से कृष्णमृगों को जसवंतगढ़ एनक्लोजर में वैज्ञानिक पुनर्स्थापित किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर जैव-विविधता को नया जीवन मिला है। राजस्थान में बाघों की आनुवांशिक सुधार हेतु अन्य राज्यों से बाघों का स्थानांतरण किया जा रहा है। 


इसी क्रम में प्रदेश सरकार द्वारा राज्य पक्षी गोडावण का जंप स्टार्ट तकनीक से संरक्षण किया जा रहा है। अरावली संरक्षण के लिए 250 करोड़ रुपए की योजना लागू की गई है, जो प्रदेश के प्राकृतिक संतुलन को सुदृढ़ कर रही है। राजस्थान प्रदेश पर्यावरण संरक्षण, हरियाली, रोजगार, जैव-विविधता और ईको-टूरिज्म के क्षेत्र में सतत विकास की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है।





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