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झुझार सिंह सर्किल की स्वीकृति निरस्त करने एवं मूर्ति ढकने की माँग

झुझार सिंह सर्किल की स्वीकृति निरस्त करने एवं मूर्ति ढकने की माँग

( चंद्रकांत बंका )
झुंझुनू के शार्दूल छात्रावास में सामाजिक संगठन सहभागी राजपूत परिवार मंच, राजस्थान के तत्वावधान में मंगलवार को एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। मंच के संस्थापक अध्यक्ष, इंजीनियर महावीर सिंह शेखावत (झाझड़) ने बताया कि नगर परिषद द्वारा 25 अप्रैल को कलेक्ट्रेट के निकट स्थित एक सर्किल का नामकरण "वीरवार झुझार सिंह" के नाम पर करने की स्वीकृति जारी की गई है।
शेखावत ने कहा कि इतिहास में "झुझार सिंह" नामक किसी भी व्यक्ति का उल्लेख नहीं मिलता है; यह नाम एक काल्पनिक उपन्यास पर आधारित है और इसी आधार पर प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ अतिक्रमणवादी मानसिकता रखने वाले लोगों द्वारा 2009 में कलेक्टर बंगले के सामने स्थित सार्वजनिक पार्क का नाम भी "झुझार सिंह पार्क" रखवाया गया था, जिसकी शिकायत सहभागी राजपूत परिवार मंच द्वारा मुख्यमंत्री तक की गई थी।
शेखावत ने आगे कहा कि भारत और राजस्थान के इतिहास में "झुझार सिंह" नामक कोई व्यक्ति किसी ऐसे पद पर नहीं रहा, जिससे यह साबित हो सके कि वह झुंझुनू का संस्थापक रहा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों का स्वयं कोई ऐतिहासिक योगदान नहीं है, वे झूठे और काल्पनिक चरित्र गढ़कर इतिहास को विकृत करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि झुंझुनू के संस्थापकों को ही सम्मान देना है, तो ध्यान देना चाहिए कि झुंझुनू पर चौहान वंश की विभिन्न शाखाओं का शासन रहा है—जिसमें कायमखानी चौहान राजपूत (जो आज मुस्लिम समुदाय से हैं), निर्माण राजपूत एवं शेखावत राजपूत शामिल हैं। यदि प्रशासन की मंशा झुंझुनू के वास्तविक शासकों को सम्मान देने की है, तो इन सभी को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए ,इस मौके पर सहभागी राजपूत परिवार मंच के संस्थापक अध्यक्ष इंजीनियर महावीर सिंह शेखावत, शब्बीर खान भगासरा, हनुमान सिंह भागेगा, सजाद खान जाबासर, महेंद्र सिंह बीरमी, मुराद खा किढ़वाना , भागीरथ सिंह दीनवा 
लड़खानी, अब्दुल खा हुकमपुरा, योगेंद्र सिंह जाखल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।।

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1 टिप्पणियाँ
बेनामी ने कहा…
हाँ ,यह सही है कि ये लोग अतिक्रमी हैं , पर यह भी सही है कि झुंझुनू के संस्थापक वीर जाट झूँझा ही थे ,जिनका जन्म धत्तरवाल गोत्र में हुआ था और जिनके द्वारा झुंझुनू को बसाने का उल्लेख धत्तरवाल वंशावली की जागा बही भाट में मिलता है और जिसे ये लोग नेहरा पहाड़ कह रहें हैं वो भी झूठ है ,झुंझुनू के दो पहाड़ों के नाम झूँझा के बेटे नाहरु व कान्हा के नाम पर पड़ें हैं ,इन सबके प्रमाण मेरे पास हैं ,कोई सुधिजन देखना चाहे तो मैं उपलब्ध करा सकता हूँ i जय झूँझार की