चूरू के मुख्य डाकघर के आगे धरने पर नेशनल यूनियन डाक कर्मचारी संघ अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय डाक कर्मचारी यूनियन के मंडल सचिव रामावतार सैनी ने बताया कि 2003 के बाद से बंद ओपीएस को पुनः लागू करना 2003 के बाद से केन्द्रिय सरकार के विभागों में सभी कार्यरत कर्मचारी एनपीएस के नियमों के अधीन आते है। एनपीएस के तहत कर्मचारी के वेतन से 10 प्रतिशत की कटोती करके राशि को पेशन फंड मे डाला जाता है। इस पूरी पूंजी को बाजार के हवाले कर दिया जाता है जो कि पूर्ण रूप से बाजार की अनिश्चितताओं के अधीन है। एक कर्मचारी अपना पूरा जीवन मेहनत व आत्म प्रतिष्ठा मे जीता है मगर एनपीएस के प्रावधानों के तहत उसे बुढापे मे भुखो मरने हुए छोड़ने पर विवश होना पड रहा है। इस एनपीएस के दुष्परिणाम अब धीरे-धीरे सामने आ रहे है। पूरी सेवा करने के बाद भी 1000 से 3000 तक की पेन्शन ही मिल पा रही है। इससे सभी कर्मचारी वर्ग में गम्भीर असन्तोष उत्पन्न हो रहा है तथा कर्मचारी असमन्जस व चिन्ता में पड़ गया है। कर्मचारी खुद को ठगा सा महसुस कर रहा है। कर्मचारी सरकारी सेवा में होते हुए भी ठेके पर काम करने वाले मजदुर माफिक हो गया है। कर्मचारी को पूरे जीवन भर काम में लेकर 60 वर्ष की उम्र में उसे असहाय परिस्थितियों मे छोडना पुर्णतः अनुचित है। यह भारतीय संविधान की धारा 19 के पूर्णतः विपरित है जो कि हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक देता है। इसके अलावा एनपीएस में कर्मचारी को मिलने वाली जीपीएफ की सुविधा भी खत्म कर दी गयी है। जिस प्रकार से सरकारी संस्थानों का निजीकरण हो रहा है, इससे यह आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि अगले 20 वर्षों में पूरा सरकारी तंत्र विलुप्त हो जायेगा तथा कोई भी सरकारी उपक्रम देखने को नहीं मिलेगा। जीडीएस कर्मचारी जो कि डाक विभाग में रीढ़ की हड्डी की तरह अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कार्य कर रहे है, उन्हें आज तक सरकारी कर्मचारी कहलाने का भी हक नहीं मिला है। उन्हें भी उनकी भविष्य की सामाजिक सुरक्षा चिन्ताओं को दूर कर उन्हें स्थाई कर्मचारी के तौर मान्यता देते हुए स्थाई किया जायें।
कोरोनाकाल में रोके गये 18 महीनों के महगाई भत्ते की राशि को तुरन्त जारी किया जाये क्योंकि अधिकांश कर्मचारियो के जीवन निर्वाह का एकमात्र स्त्रोत सरकारी वेतन ही है जो कि तेजी से बढ़ रही महगाई पर एक मलहम की तरह कार्य करेगा अंनुकम्पा नियुक्ति में 5 प्रतिशत की सीमा को समाप्त करना। वर्तमान मे अनुकम्पा में दी जा रही नियुक्तियों की सीमा 5 प्रतिशत है जो कि पहाड़ के सामने राई जितनी ही मात्रा है। अतः इस सीमा को खत्म कर लाभान्वितो का राहत प्रदान की जाये। सप्ताह मे पाँच दिनों का कार्य दिवस लागू करना।हमारी मांगो पर करुणापूर्वक रवैया रखते हुए संवैधानिक व कानूनी स्वीकृति प्रदान करेगें। एनएफपीयू सचिव सज्जन सिंह, पोस्टमास्टर श्यामसुंदर स्वामी, उप डाकपाल तारानगर रामूसिंह, सरदारशहर के रमेश मीणा,सुजानगढ के शीशराम, सादुलपुर के सुभाष चण्डे , ओमप्रकाश मीणा, पवन कुमार मेहड़ा, प्यारेलाल मील ,अमर चन्द सोनी, लक्ष्मी नारायण मीणा ,जयप्रकाश लेमी, बीड़दीचन्द आदि हड़ताल पर बैठे। यूनियन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलक्टर ज्ञापन सौंपा।

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