आजादी के अमृत महोत्सव के तहत रतननगर में स्वतंत्रता सेनानी कमला नेहरू की स्मृति में हुआ आयोजन
चूरू,। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न धर्म, वर्ग, जाति, समूहों के स्त्री और पुरुष मिलकर अंग्रेजों से लड़े और आजाद भारत के सपने देखते हुए अपना सर्वस्व होम दिया, तब कहीं जाकर हमें आजादी मिली। भारतीय फलक पर उस वक्त स्त्रियों की स्थिति उतनी सामान्य नहीं थी, फिर भी आजादी आंदोलन में कमला नेहरू जैसी अनेक स्त्रियों ने अपने घर को आजादी आंदोलन का कैंप बनाया और स्वतंत्रता की अलख जगाई।
ये विचार भारत की स्वतंत्रता के पचहतरवें साल पर जिला प्रशासन और महात्मा गांधी जीवन दर्शन समिति की ओर से सोमवार को राजकीय बुधिया बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, रतननगर में स्वतंत्रता सेनानी कमला नेहरू के स्मृति दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामनिवास जाट ने व्यक्त किए। सीईओ रामनिवास जाट ने कहा कि आजाद भारत में नई पीढी वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ते हुए देश को और ऊंचाइयों तक लेकर जाएगी, तब ही स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान सार्थक होगा।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता राजकीय लोहिया महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान की एसोशिएट प्रोफेसर डॉ. सरोज हारित ने कहा कि आर्थिक रूप से समृद्ध विरासत की धनी कमला नेहरू भारत के आजादी आंदोलन में विभिन्न मोर्चों पर डटी और जेल गई। अपने पति जवाहरलाल नेहरू के संघर्ष की सहधर्मिणी और बेटी इंदिरा के संस्कारों की दात्री कमला नेहरू स्वदेशी आंदोलन और असहयोग आंदोलन के वक्त जनजागरूकता हेतु आनंद भवन छोड़कर सड़कों पर आई और जनमानस में एक जज्बा पैदा किया। महिलाएं नेतृत्व के जज्बे के बूते पर आजादी आंदोलन में और अधिक सक्रिय हुईं तथा कालांतर में उसी प्रतिफल से हिंदुस्तान आजाद हुआ।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रतननगर एसएचओ सुरेंद्रसिंह राणा ने कहा कि आजाद भारत में विभिन्न सरकारी इकाइयाँ जनसेवा के लिए हैं और खासकर पुलिस की भूमिका आमजन में विश्वास की है। आमजन का विश्वास ही लोकतंत्र का सच है और यह हमें बनाए रखना होगा। प्रारंभ में संस्था प्रधान सरिता आत्रेय ने अतिथियों का स्वागत किया। शिक्षक इकबाल गौरी, महेश कुमार सुमनबाला, प्रेम प्रकाश ने आयोजकीय व्यवस्थाएं संभाली। कार्यक्रम के जिला संयोजक डॉ. दुलाराम सहारण ने धन्यवाद दिया। संचालन अहिंसा प्रकोष्ठ प्रभारी उम्मेद सिंह गोठवाल ने किया।

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