चूरू के दुलाराम सहारण द्वारा गांधी साहित्य के किए गए राजस्थानी अनुवाद का किया विमोचन
चूरू/जयपुर। विश्व के बदलते परिदृश्य के बीच अहिंसा और शांति के प्रतीक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आज और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। युवा शक्ति को जिस ढंग से आज राजनीतिक ताकतों द्वारा इस्तेमाल विभाजक यंत्र के रूप में किया जा रहा है वह हिंसक है और उस माहौल को सकारात्मक बनाने के लिए जरूरी है कि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा सृजनात्मकता से जोड़ा जाए।
उक्त विचार मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने रविवार शाम मुख्य मंत्री निवास जयपुर में गांधी स्मृति शहीद दिवस पर महात्मा गांधी की कृतियों के चूरू निवासी साहित्यकार दुलाराम सहारण द्वारा किए गए राजस्थानी अनुवाद 'सर्वोदय', 'मंगळ प्रभात' और आत्मकथा 'साच रा तजरबा' का विमोचन करते हुए व्यक्त किए।
गहलोत ने कहा कि गांधी साहित्य युवाओं के बीच अधिकाधिक पहुंचे यह सामयिक जरूरत है। इस अवसर पर राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक बीएल सैनी, अहिंसा प्रकोष्ठ चूरू प्रभारी उम्मेद सिंह गोठवाल, उद्योग मंत्री शंकुतला रावत, मुख्य मंत्री के विशेषाधिकारी देवाराम सैनी राजस्थान बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल भी मौजूद रहे।

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